हेमंत सोरेन का बड़ा निर्देश: हर शहर में बढ़ेंगे दाल-भात केंद्र, गरीबों को मिलेगी और राहत

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में गरीबों, श्रमिकों और जरूरतमंद लोगों को बेहतर खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री दाल-भात योजना के विस्तार का निर्देश दिया है। मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों की सुविधा के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर नए दाल-भात केंद्र स्थापित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में मुख्यमंत्री दाल-भात योजना के तहत 370 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां मात्र पांच रुपये में लोगों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दाल-भात केंद्रों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ कुछ केंद्रों को मॉडल दाल-भात केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि जरूरतमंद लोगों को बेहतर सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विशिष्ट जनजाति खाद्यान्न सुरक्षा योजना (पीवीटीजी डाकिया योजना) की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि डोर-स्टेप डिलीवरी व्यवस्था के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों तक खाद्यान्न की नियमित और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी पात्र परिवार को योजना के लाभ से वंचित नहीं होना चाहिए।

धान अधिप्राप्ति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 49 लाख 25 हजार क्विंटल धान की खरीद की गई है। इस दौरान उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से कारीमाटी गांव के किसान निगम प्रसाद उपाध्याय से बातचीत की। किसान ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने पैक्स के माध्यम से 160 क्विंटल धान बेचा था और उसका भुगतान उन्हें एक ही दिन में प्राप्त हो गया। मुख्यमंत्री ने इसे किसानों के हित में सकारात्मक पहल बताते हुए अधिकारियों को भुगतान प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता विभाग द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में निरंतर प्रगति, खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्यवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पात्र लाभुकों तक खाद्यान्न की समयबद्ध, पारदर्शी और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही राशन कार्ड से जुड़े मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाए तथा नए पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ा जाए। अपात्र लाभुकों की पहचान कर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने खाद्यान्न वितरण प्रणाली में आधुनिक तकनीक और नवाचारों को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित होंगी।

बैठक में गोदामों की मरम्मत और नए गोदामों के निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अनाज के सुरक्षित भंडारण और बेहतर रखरखाव पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसके अलावा वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने सोना-सोवरन धोती-साड़ी वितरण योजना, मुख्यमंत्री दाल-भात योजना और मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना की प्रगति का भी विस्तृत आकलन किया। बैठक में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव राजेश कुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

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