ईरान के जवाबी हमले से बढ़ा तनाव, अमेरिकी एयरबेस पर क्या हुआ जिसने बढ़ाई दुनिया की चिंता?

 अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में क्षेत्र में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच जारी नाजुक युद्धविराम पर भी सवाल उठने लगे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने उस अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया, जहां से ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों, विशेष रूप से बंदर अब्बास के आसपास सैन्य गतिविधियां संचालित की गई थीं। ईरान ने इस कार्रवाई को अमेरिकी हमलों के खिलाफ जवाबी कदम बताया है।

अमेरिकी अधिकारियों ने भी क्षेत्र में हमले की घटना की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि पिछले 24 घंटों के दौरान कुवैत स्थित अली अल सलेम एयर बेस की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई। हालांकि, कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, लेकिन उसका मलबा सैन्य परिसर में गिरा। इससे कुछ अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर सामने आई है।

मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना के दो महत्वपूर्ण एमक्यू-9 रीपर ड्रोन इस घटना में क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें से एक ड्रोन के पूरी तरह नष्ट होने और दूसरे के गंभीर रूप से प्रभावित होने की बात कही जा रही है। रीपर ड्रोन अमेरिकी रक्षा तंत्र का अहम हिस्सा माने जाते हैं और इनका उपयोग निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने तथा सटीक हवाई अभियानों में किया जाता है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में ईरान के साथ संभावित समझौते, युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, बैठक के बाद किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई।

विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के चलते आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के संबंधों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.