मुंबई। महाराष्ट्र सरकार मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में सरकारी जमीन पर बने प्रतिष्ठित जिमखानों और क्लबों को लेकर नई नीति तैयार कर रही है। इस पहल का उद्देश्य इन संस्थानों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आम जनता के लिए सुलभ बनाना है। साथ ही सरकार इन बहुमूल्य सरकारी जमीनों पर अपने नियंत्रण को भी मजबूत करना चाहती है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) महालक्ष्मी रेसकोर्स के एक बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में लेकर उसे सार्वजनिक पार्क के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया में जुटा है। इसके बाद राज्य सरकार ने भी जिमखानों और क्लबों की लीज, उपयोग और सदस्यता व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है।
राजस्व एवं वन विभाग ने फरवरी 2026 में एक विशेष अध्ययन समूह का गठन किया था, जिसे राज्यभर के जिमखानों और क्लबों की वर्तमान नीतियों की समीक्षा का जिम्मा सौंपा गया। जांच में पाया गया कि कई जिमखानों को वर्षों पहले बेहद रियायती दरों पर सरकारी जमीनें लीज पर दी गई थीं। अब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन जमीनों का उपयोग व्यापक जनहित में हो।
नई नीति के तहत क्लबों की सदस्यता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा उनके राजस्व मॉडल और लीज शर्तों का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में खुले स्थानों की भारी कमी है। एक स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार, शहर के कुल 3,780 एकड़ खुले क्षेत्र में से लगभग 664 एकड़ भूमि विभिन्न जिमखानों और क्लबों के कब्जे में है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में 20 से अधिक बड़े जिमखाने और क्लब संचालित हैं। इनमें से कई क्लबों की सदस्यता फीस एक करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि सदस्य बनने के लिए लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। इनमें से 16 जिमखाने कलेक्टर की जमीन पर स्थित हैं।
हाल ही में प्रशासन ने बॉम्बे जिमखाना, हिंदू जिमखाना, इस्लाम जिमखाना, पारसी जिमखाना और वोडहाउस जिमखाना समेत 16 संस्थानों का निरीक्षण कराया। अधिकारियों ने भूमि उपयोग, रिकॉर्ड और संभावित अनियमितताओं की जांच की। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया पहले से जारी है और इसका उद्देश्य लीज एवं लाइसेंस शुल्क की समीक्षा के साथ सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना है।