गौशालाओं के लंबित कार्यों पर सख्त हुए आयोग अध्यक्ष, एक महीने की डेडलाइन

 रानीखेत। Dr. Rajendra Prasad Anathwal ने गुरुवार को अल्मोड़ा पहुंचकर कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद में संचालित निराश्रित गौकल्याण कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में गौशालाओं की स्थिति, निर्माणाधीन परियोजनाओं, गोवंश संरक्षण, टैगिंग व्यवस्था और गौसेवकों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा की गई। इस दौरान आयोग अध्यक्ष ने लंबित कार्यों पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को एक माह के भीतर सभी अधूरे निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में डॉ. अणथवाल ने कहा कि गोवंश को “आवारा” कहने के बजाय “निराश्रित गोवंश” अथवा “नंदी बाबा” कहकर संबोधित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व में राज्य सरकार गोवंश संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

बैठक के दौरान गौसेवकों ने पानी की कमी, गौशालाओं के विस्तार में देरी और भूसा-चारे में आग लगाने जैसी समस्याएं उठाईं। इस पर आयोग अध्यक्ष ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन चेकिंग और पशु तस्करी पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने “ऑपरेशन कामधेनु” को प्रभावी पहल बताते हुए कहा कि टैगिंग के जरिए निराश्रित पशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है और इसमें पुलिस व नगर निकायों का बेहतर समन्वय जरूरी है।

डॉ. अणथवाल ने मासी क्षेत्र में गौशाला के पास आगजनी की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जताई और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गौशाला में सीसीटीवी और जीपीएस जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही बायोगैस, गोमूत्र और गोबर से उत्पाद निर्माण कर आत्मनिर्भरता बढ़ाने तथा केंचुआ खाद निर्माण को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया।

उन्होंने वर्ष 2026 तक प्रत्येक क्षेत्र में 25 ग्राम गौसेवक तैयार करने का लक्ष्य तय करने और पशु चिकित्सकों को गांव-गांव जाकर योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश भी दिए। बैठक में आयोग सदस्य, पशु चिकित्सा अधिकारी और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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