Karnataka में कप्तानी बदली: सिद्धारमैया का इस्तीफा, DK Shivakumar होंगे नए CM

कर्नाटक सत्ता परिवर्तन: कांग्रेस के 'पावर शेयरिंग फॉर्मूले' के तहत सीएम सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे इस्तीफा सौंपेंगे। उन्होंने खुद अगले मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखा है। कैबिनेट बैठक में शिवकुमार ने सिद्धारमैया का आशीर्वाद लिया, जिससे सत्ता हस्तांतरण के बीच पार्टी में पूरी एकजुटता का संदेश गया है...

चाणक्य मंत्र ब्यूरो, नई दिल्ली: कर्नाटक की सियासत में लंबे समय से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट आखिरकार एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के साथ अंजाम तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा पद से इस्तीफे के औपचारिक एलान और अगले मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखने के बाद राज्य में सत्ता के नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। विश्लेषण के नजरिए से देखें तो यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में कांग्रेस के आंतरिक सत्ता संतुलन और ‘पावर शेयरिंग फॉर्मूले’ का एक बेहद परिपक्व उदाहरण पेश करता है।

सिद्धारमैया ने अपने आवास पर आयोजित कैबिनेट मंत्रियों की ब्रेकफास्ट मीटिंग में भावुक माहौल के बीच न केवल अपने तीन साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड सामने रखा, बल्कि चुनावी गारंटियों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सभी सहयोगियों का आभार भी जताया। इस बैठक की सबसे बड़ी सुर्खी वह पल रहा जब डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और दोनों नेताओं ने गले मिलकर पार्टी की एकजुटता का एक मजबूत संदेश दिया, जिसने विपक्ष के तमाम कयासों पर विराम लगा दिया।

संवैधानिक और प्रशासनिक तौर पर इस घटनाक्रम में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब यह साफ हुआ कि राज्यपाल के बेंगलुरु में मौजूद न होने के कारण सिद्धारमैया अपना आधिकारिक इस्तीफा राजभवन सचिवालय या राज्यपाल के प्राइवेट सेक्रेटरी को सौंपेंगे। नियमों के मुताबिक राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी राजभवन का सचिवालय इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सक्षम है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीके शिवकुमार को कमान सौंपने का यह फैसला कर्नाटक में कांग्रेस संगठन को और धार देने की रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि शिवकुमार को राज्य में पार्टी का सबसे बड़ा संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार माना जाता है।

सिद्धारमैया जैसे कद्दावर और जनाधार वाले नेता द्वारा खुद उनके नाम को प्रस्तावित करना यह दर्शाता है कि यह सत्ता हस्तांतरण आपसी सहमति और बेहद सलीके से तय किया गया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद डीके शिवकुमार सूबे की वित्तीय स्थिति को संभालते हुए आगामी राजनैतिक चुनौतियों का सामना किस तरह करते हैं।

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