दिल्ली-NCR में 45°C का टॉर्चर: ट्रैफिक पुलिस की ढाल बने ‘AC हेलमेट’, तकनीक से हीटवेव को मात!
12 डिग्री तक गिरेगा तापमान : यह सोलर और बैटरी चालित हेलमेट सिर के आसपास के तापमान को 8 से 12 डिग्री तक कम कर देता है। इसके साथ ही कॉलर पंखे और ओआरएस जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए इस 'साइलेंट डिजास्टर' से निपटने और फ्रंटलाइन वर्कर्स की कार्यक्षमता बचाए रखने के लिए यह तकनीकी कदम बेहद सराहनीय है…
चाणक्य मंत्र ब्यूरो, नई दिल्ली।
दिल्ली–एनसीआर में आसमान से बरसती आग और 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाते पारे ने जहां आम जनजीवन की रफ्तार थाम दी है, वहीं इस भीषण हीटवेव के बीच सड़कों पर मुस्तैद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा शुरू किया गया ‘एसी हेलमेट‘ और एडवांस कूलिंग गैजेट्स का यह पायलट प्रोजेक्ट केवल एक प्रशासनिक सुधारात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह बदलती जलवायु चुनौतियों के बीच अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को बचाने की एक बेहद संवेदनशील और वैज्ञानिक रणनीति है।
तीन मूर्ति गोलचक्कर जैसे बेहद व्यस्त और गर्म चौराहों पर तैनात अधिकारियों को दिए गए ये विशेष सौर–सहायता प्राप्त (सोलर–असिस्टेड) और बैटरी चालित हेलमेट सीधे तौर पर सिर के आसपास के तापमान को 8 से 12 डिग्री सेल्सियस तक कम कर देते हैं, जो अत्यधिक गर्मी में सनस्ट्रोक और गंभीर डिहाइड्रेशन के खतरे को काफी हद तक टालने में सक्षम है।
विश्लेषणात्मक नजरिए से देखा जाए तो महानगरों में अब हीटवेव एक ‘साइलेंट डिजास्टर‘ का रूप ले चुकी है, जहां कंक्रीट के जंगलों और वाहनों के धुएं के बीच जमीनी स्तर पर काम करना सीधे तौर पर मानव संसाधन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। ऐसे में कॉलर पंखे, पोर्टेबल हैंडहेल्ड वेंटिलेटर, ओआरएस घोल और टिन शेड जैसी चौतरफा व्यवस्थाएं पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता और मानसिक सतर्कता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हो जाती हैं।
प्रशासन का यह प्रोएक्टिव रुख यह साबित करता है कि आधुनिक दौर की आपदाओं से निपटने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय तकनीकी नवाचारों को अपनाना समय की मांग है। वर्तमान में परीक्षण के दौर से गुजर रही इस योजना की सफलता आने वाले समय में देश के अन्य गर्म राज्यों के लिए भी एक रोल मॉडल बनेगी, जिससे न केवल ट्रैफिक मैनेजमेंट सुधरेगा बल्कि सरकारी तंत्र में मानवीय संवेदनाओं को भी एक नई दिशा मिलेगी।