Oil कीमतों पर विपक्ष का तीखा वार: Mallikarjun Kharge ने बताया ‘रोजाना की डकैती’

ईंधन पर राजनीतिक घमासान: पिछले दो हफ्तों से कम समय में चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, कांग्रेस अध्यक्ष ने यूपीए और एनडीए शासनकाल के कच्चे तेल के आंकड़ों से घेरा...

चाणक्य मंत्र डेस्क।

नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सोमवार को ईंधन की दरों में एक बार फिर बड़ा इजाफा होने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) ने इस मूल्य वृद्धि पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे Modi सरकार द्वारा देश की जनता पर किया जाने वाला ‘दैनिक वित्तीय हमला’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निरंतर होने वाली मूल्य वृद्धि का सीधा खामियाजा आम आदमी को अपनी जेब से भुगतना पड़ रहा है।

Monday को हुए ताजा संशोधन के तहत Petrol में 2.61 रुपये और Diesel में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है, जो पिछले 12 दिनों के भीतर चौथी बड़ी बढ़ोतरी है। इस बदलाव के बाद Delhi में पेट्रोल 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये और डीजल 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। कांग्रेस प्रमुख ने Social Media प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि महज 10 दिनों के भीतर पेट्रोल में कुल 7.35 रुपये और डीजल में 7.53 रुपये प्रति लीटर का उछाल आ चुका है, जो आम जनता की घरेलू बचत को पूरी तरह प्रभावित कर रहा है।

आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए खरगे ने संप्रग (UPA) और वर्तमान सरकार के कार्यकाल की तुलना की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 175.34 प्रतिशत तक बढ़ी थीं, जबकि इसके विपरीत मोदी सरकार के दौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम एक प्रतिशत भी नहीं बढ़े। इसके बावजूद, 2014 से 2026 के बीच देश में पेट्रोल 71.41 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये (43.01% वृद्धि) और डीजल 56.71 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर (67.87% वृद्धि) पर पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में इस कर व्यवस्था के जरिए भारी राजस्व जुटाया गया है।

खरगे ने शेयर बाजार के घटनाक्रमों को इस नीति से जोड़ते हुए कहा कि जहां एक तरफ आम जनता परेशान है, वहीं दूसरी तरफ तेल वृद्धि की घोषणा के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी के शेयरों में क्रमशः 5.8 प्रतिशत, 4.44 प्रतिशत और 3.90 प्रतिशत का उछाल देखा गया। उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि इस वित्तीय नीति का असर किसानों से लेकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) तक, समाज के हर वर्ग पर पड़ रहा है और अर्थव्यवस्था में चौतरफा दबाव बढ़ रहा है।

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