कोलकाता। पूर्वी हिमालय के घने जंगलों से एक ऐसी दुर्लभ वनस्पति प्रजाति की पुनर्खोज हुई है, जिसे वैज्ञानिक लगभग 188 वर्षों से विलुप्त मान रहे थे। इस ऐतिहासिक खोज ने वनस्पति विज्ञान की दुनिया में नई हलचल पैदा कर दी है। इस महत्वपूर्ण शोध को जर्मनी की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Feddes Repertorium में प्रकाशित किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च प्रभाव वाली शोध पत्रिका माना जाता है।
शोधपत्र का शीर्षक “वैक्सीनियम पिलिफेरम की पुनर्खोज : पूर्वी हिमालय जैव विविधता क्षेत्र की एक विलुप्तप्राय प्रजाति” रखा गया है। जानकारी के अनुसार इस दुर्लभ पौधे को अक्टूबर 2024 में अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के विजयनगर क्षेत्र में वनस्पति विज्ञान के छात्र और शोधकर्ता विनय कुमार साहनी ने खोजा था। बाद में प्रसिद्ध भारतीय ब्लूबेरी विशेषज्ञ Subhashis Panda ने इसकी पहचान वैक्सीनियम पिलिफेरम के रूप में की।
डॉ. पांडा ने इस पौधे पर विस्तृत अध्ययन कर शोधपत्र तैयार किया। उन्होंने बताया कि इस प्रजाति की पहली खोज 26 नवंबर 1836 को ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक William Griffith ने मिश्मी पर्वतीय क्षेत्र, वर्तमान दिबांग वैली जिले में की थी। इसके बाद लगभग दो सदियों तक इस पौधे का कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया।
इस खोज की सबसे खास बात यह रही कि वैज्ञानिकों ने इस पौधे को फूल और फल दोनों अवस्थाओं में एक साथ दर्ज किया। वनस्पति विज्ञान में इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुनर्खोज जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय पौधों के अध्ययन के लिए बेहद अहम साबित होगी।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस शोध से संरक्षण विशेषज्ञों, पारिस्थितिकीविदों और ऊतक संवर्धन वैज्ञानिकों को इस दुर्लभ प्रजाति को बचाने और भविष्य में इसके संरक्षण के नए उपाय विकसित करने में मदद मिलेगी। यह खोज पूर्वी हिमालय की समृद्ध जैव विविधता को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है।