नई दिल्ली, भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय के हालिया फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि भारत तथाकथित “अवैध रूप से गठित” मध्यस्थता न्यायालय को मान्यता नहीं देता और उसके किसी भी फैसले को कानूनी रूप से वैध नहीं मानता। मंत्रालय ने दोहराया कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला आगे भी जारी रहेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि 15 मई को तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय ने संधि की व्याख्या से जुड़े एक पुराने मामले में “अधिकतम भार” संबंधी फैसला सुनाया था, लेकिन भारत इस फैसले को पूरी तरह अस्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी इस मध्यस्थता निकाय की वैधता स्वीकार नहीं की और इसके द्वारा जारी सभी फैसले अमान्य हैं।
भारत का यह कड़ा रुख ऐसे समय सामने आया है जब अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। इसी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का अधिकांश जल उपयोग करने का अधिकार मिला हुआ है, जबकि भारत के पास रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण है। संधि के अनुसार पाकिस्तान को करीब 80 प्रतिशत जल उपयोग का अधिकार प्राप्त है।
विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। भारत ने पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को पूरी तरह समाप्त करने की मांग दोहराई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।