देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून जिले में हाइब्रिड धान खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सहसपुर और विकासनगर ब्लॉक में शुरू की गई इस पहल से किसानों की आय और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधुनिक कृषि तकनीक और हाईब्रिड बीजों के प्रयोग ने परंपरागत खेती की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है।
कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में सहसपुर और विकासनगर की 20 ग्राम पंचायतों के 70 किसानों को 28 कुंतल हाईब्रिड धान बीज वितरित किए गए। इसके तहत करीब 70 हेक्टेयर कृषि भूमि पर हाईब्रिड धान की खेती शुरू की गई। योजना के शुरुआती परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं।
पहले किसान एक हेक्टेयर भूमि से औसतन 45 कुंतल धान उत्पादन प्राप्त करते थे, जिससे उन्हें लगभग 81 हजार रुपये की आय होती थी। लेकिन हाईब्रिड बीजों के इस्तेमाल के बाद धान की पैदावार बढ़कर 62 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। इसके साथ ही किसानों की आय बढ़कर करीब 1.13 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। यानी किसानों की आमदनी में लगभग 32 हजार रुपये और करीब 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस सफलता के बाद क्षेत्र के किसानों में उत्साह बढ़ गया है। आसपास के अन्य किसान भी अब हाईब्रिड धान बीज अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। कृषि विभाग का मानना है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन हासिल करने की यह तकनीक भविष्य में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
मुख्य कृषि अधिकारी Devendra Rana ने बताया कि योजना के बेहतर परिणामों को देखते हुए खरीफ 2025 में हाईब्रिड धान उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाकर 186 हेक्टेयर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
कृषि विभाग की यह योजना अब आधुनिक खेती और बढ़ती किसान आय का सफल मॉडल बनकर सामने आ रही है।