रोज खाना बनाना दिमाग के लिए फायदेमंद! रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

खाना बनाना केवल स्वादिष्ट भोजन तैयार करने का काम नहीं है, बल्कि यह दिमाग को तेज और सक्रिय रखने का भी एक प्रभावी तरीका बन सकता है। हाल ही में सामने आई एक रिसर्च में दावा किया गया है कि नियमित रूप से कुकिंग करने वाले लोगों में भूलने की बीमारी, डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी मानसिक समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। वैज्ञानिकों ने कुकिंग को “कॉग्निटिव एक्सरसाइज” यानी दिमागी व्यायाम का दर्जा दिया है।

जापान के Tokyo Institute of Science के शोधकर्ताओं ने 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के करीब 11 हजार लोगों की जीवनशैली का छह वर्षों तक अध्ययन किया। यह रिसर्च BMJ Journal of Epidemiology and Community Health में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग सप्ताह में कम से कम एक बार भी मन लगाकर खाना बनाते हैं, उनकी मानसिक क्षमता अधिक सक्रिय रहती है और याददाश्त कमजोर होने की संभावना कम हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार खाना बनाना एक ऐसा काम है जिसमें दिमाग को एक साथ कई स्तरों पर काम करना पड़ता है। सब्जियां काटना, मसालों का संतुलन बनाना, गैस की आंच पर नजर रखना और समय का सही प्रबंधन करना दिमाग की प्लानिंग और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। यही वजह है कि कुकिंग मानसिक सक्रियता बढ़ाने में मददगार मानी जा रही है।

रिसर्च में यह भी सामने आया कि खाना बनाते समय हमारी सभी इंद्रियां सक्रिय रहती हैं। मसालों की खुशबू, तड़के की आवाज, रंग और स्वाद का अनुभव दिमाग के न्यूरॉन्स को सक्रिय बनाए रखता है। साथ ही किसी रेसिपी को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की प्रक्रिया ध्यान और मेडिटेशन की तरह मानसिक शांति और फोकस बढ़ाने में मदद करती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति रोज खाना नहीं बना सकता, तो सप्ताह में एक दिन अपनी पसंद का भोजन खुद तैयार करना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। इससे तनाव कम होता है और शरीर में डोपामाइन जैसे “हैप्पी हार्मोन” का स्तर बढ़ता है, जिससे मूड बेहतर होता है और दिमाग लंबे समय तक स्वस्थ बना रहता है।

 

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