देहरादून। Graphic Era Deemed University में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘बायोकॉम 2026’ के समापन समारोह में विशेषज्ञों ने पारंपरिक बीजों के संरक्षण को पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बदलती जीवनशैली और आधुनिक कृषि पद्धतियों के बीच पारंपरिक बीजों और खाद्य प्रणालियों को बचाना आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है।
समारोह की मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की अपर सचिव Ruchi Mohan Rayal ने कहा कि सतत पोषण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक खाद्य प्रणालियों के संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीकों और नवाचार को अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक बीजों और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को संरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में खाद्य संकट और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
सम्मेलन में Chef Parvinder Singh Bali ने भी पारंपरिक खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं उत्तराखंड के प्रसिद्ध ‘सीड मैन’ Vijay Jardhari ने देसी बीजों के संरक्षण को किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बीज न केवल जैव विविधता को बचाते हैं, बल्कि प्राकृतिक खेती को भी मजबूती देते हैं।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन Graphic Era Deemed University के डिपार्टमेंट ऑफ बायोसाइंसेज और डिपार्टमेंट ऑफ हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम में डिपार्टमेंट ऑफ बायोसाइंसेज की विभागाध्यक्ष डॉ. मनु पंत और हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट विभाग के प्रमुख डॉ. अमर डबराल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
सम्मेलन के दौरान सतत कृषि, जैव विविधता, पोषण और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए स्थानीय बीजों और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।