क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? युद्ध के बीच कच्चे तेल ने छुआ बड़ा स्तर

नई दिल्ली। वैश्विक तनाव और युद्ध की स्थिति का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां लगातार नुकसान झेल रही हैं और आने वाले दिनों में ईंधन के दाम बढ़ाए जा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसके पीछे ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को बड़ी वजह माना जा रहा है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। हालांकि इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपए प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है।

दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। हॉन्ग कॉन्ग में पेट्रोल लगभग 295 रुपए प्रति लीटर, सिंगापुर में 240 रुपए, नीदरलैंड्स में 225 रुपए, इटली में 210 रुपए और ब्रिटेन में करीब 195 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं भारत में पेट्रोल की कीमत फिलहाल 95 रुपए प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है।

सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देने के लिए पहले ही एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। साथ ही भारत रूस, अमेरिका और अन्य देशों से तेल खरीदकर सप्लाई संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं या सरकार राहत देती है।

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