मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बना हुआ है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 11 पैसे गिरकर 94.95 के स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर रुपये पर देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में सुबह के कारोबार के दौरान रुपया गिरावट के साथ खुला और 94.95 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को रुपया 94.84 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था। शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के कारण शेयर बाजार और मुद्रा बाजार बंद रहे, जिससे सोमवार को कारोबार शुरू होते ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
इस बीच वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी रुपये की कमजोरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। US Dollar Index, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ 98.19 के स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में रुपये पर और दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक आर्थिक संकेतक भी रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारतीय मुद्रा फिलहाल दबाव में नजर आ रही है और बाजार में अस्थिरता बनी रहने के संकेत मिल रहे हैं।