‘विकसित भारत’ का मंत्र: सिविल सेवकों को नरेन्द्र मोदी की खास सीख

सिविल सेवा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सिविल सेवकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रसेवा को ‘विकसित भारत’ की सबसे मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा कि जब तक विकास का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक सच्चे अर्थों में देश का समग्र विकास संभव नहीं है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सिविल सेवकों की भूमिका को बेहद अहम बताते हुए कहा कि वे शासन और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें आदर्श जीवन मूल्यों का उल्लेख किया गया है।

इस सुभाषित के माध्यम से प्रधानमंत्री ने बताया कि सच्ची शिक्षा का सार अच्छे चरित्र, दूसरों के हित में समर्पण, अहंकार से दूर रहना, क्षमा, धैर्य और लोभ का त्याग है। उन्होंने कहा कि यही गुण एक आदर्श सिविल सेवक की पहचान होते हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सिविल सेवकों से आह्वान किया कि वे जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा दिवस न केवल उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि यह आत्ममंथन और भविष्य के संकल्पों को मजबूत करने का भी अवसर है।

उन्होंने सिविल सेवकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर किए गए उनके प्रयास लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। नीति निर्माण से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन तक उनकी भूमिका देश की प्रगति में निर्णायक होती है।

प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि देश के सिविल सेवक उत्कृष्टता, संवेदनशीलता और नवाचार के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

 

 

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