देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा 2026 को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए अहम पहल की है। इसी दिशा में उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड और कौशल विकास विभाग द्वारा “चारधाम यात्रा 2026 हेतु स्किलिंग” विषय पर एक उच्च स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई।
कार्यक्रम का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, कौशल विकास सचिव सी. रविशंकर, अपर सचिव अभिषेक रुहेला और नरेंद्र सिंह भंडारी सहित कई विशेषज्ञ और प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि चारधाम यात्रा के दौरान गाइड, ड्राइवर, पोर्टर और आतिथ्य से जुड़े कर्मी यात्रियों के लिए पहला संपर्क बिंदु होते हैं। इसलिए उनकी पेशेवर दक्षता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए, जिनमें न्यूनतम दक्षता मानकों का निर्धारण, स्थानीय भाषाओं में अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रमाणन और पहचान-पत्र आधारित प्रणाली लागू करना शामिल है।
साथ ही, कार्यबल को प्राथमिक उपचार, मौसम की जानकारी और भीड़ प्रबंधन जैसे जरूरी सुरक्षा प्रशिक्षण देने पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और कर्मचारियों को औपचारिक पहचान के साथ सम्मान भी मिलेगा।
बैठक के दूसरे चरण में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। होमस्टे संचालकों, स्थानीय विक्रेताओं, कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को इस योजना से जोड़ने पर जोर दिया गया, ताकि उन्हें सीधे आर्थिक लाभ मिल सके।
सरकार का लक्ष्य है कि इस पहल के जरिए चारधाम यात्रा को न केवल बेहतर बनाया जाए, बल्कि इसे स्थानीय रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम भी बनाया जाए।