हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख एवं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. प्रणव पण्ड्या का 76वां जन्मदिन रविवार को शांतिकुंज में चेतना दिवस के रूप में सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल और मां गायत्री का विधि-विधान से पूजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्यारह दीप प्रज्वलित कर डॉ. पण्ड्या के स्वस्थ, सुखी और दीर्घ जीवन की कामना की गई।
जन्मदिन के अवसर पर गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं, साधकों और अनुयायियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने डॉ. पण्ड्या के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन अपने आराध्य और गुरु के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे व्यक्तित्व कम ही देखने को मिलते हैं, जो पद और वैभव से ऊपर उठकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा मानवता के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं। डॉ. पण्ड्या ने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से सेवा एवं समर्पण की भावना को नई दिशा दी है।
डॉ. प्रणव पण्ड्या ने शिक्षा पूरी करने के बाद अपना जीवन सद्गुरु पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के मार्गदर्शन में गायत्री परिवार के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने साधना, सेवा और संगठन को समाज एवं राष्ट्र के उत्थान का माध्यम बनाया। उनका जीवन दर्शन आत्मपरिष्कार, नवचेतना और श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण का संदेश देता है।
डॉ. पण्ड्या ने अपने विचारों और लेखन के माध्यम से भी समाज को प्रेरित किया है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ‘गुरुगीता’ और ‘चेतना की शिखर यात्रा’ सहित कई दर्जन पुस्तकें शामिल हैं। उनका प्रेरक संदेश ‘बी बर्न अगेन’ भी इस अवसर पर चर्चा का विषय रहा।
इस मौके पर देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों और गणमान्य व्यक्तियों ने डॉ. पण्ड्या को जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजीं। शांतिकुंज में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धा, साधना और सेवा के भाव प्रमुख रूप से दिखाई दिए।

