राज्यपाल ने कहा कि लोक भवन जनता की अपेक्षाओं और भावनाओं से जुड़ा संस्थान है। यहां आने वाले प्रत्येक नागरिक को सहज पहुंच, सम्मानजनक व्यवहार और अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों की समस्याओं और विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण में संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा तत्परता को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पत्रावली को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। प्रत्येक प्रकरण का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। राज्यपाल ने अधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी जिम्मेदारी, समर्पण और मनोयोग के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि लोक भवन की प्रतिष्ठा केवल एक संवैधानिक संस्थान होने से नहीं, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता और आम लोगों के विश्वास से और मजबूत होती है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपने दायित्वों का निर्वहन जनहित को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
बैठक के बाद राज्यपाल ने लोक भवन सचिवालय के विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया और वहां संचालित कार्यों तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने लोक भवन पुस्तकालय का भ्रमण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी ली।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव रविनाथ रामन, अपर सचिव रीना जोशी, अपर सचिव वित्त डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव, डॉ. ए.के. सिंह, उप सचिव लक्ष्मण राम आर्या, अनुसचिव अनूप सिंह नेगी सहित लोक निर्माण विभाग, सूचना, उद्यान, सुरक्षा और चिकित्सा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
