नई दिल्ली, 25 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में महान विभूतियों को याद किया और देशभर में हो रहे प्रेरणादायक प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स के जनक नरिंदर सिंह कपानी और स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानंद के योगदान को याद करते हुए युवाओं से उनके जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेने की अपील की। साथ ही, 31 अक्टूबर को ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रामायण की शिक्षाएं आज भी लोगों को सेवा, करुणा, सामाजिक समरसता और निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए लोगों के प्रयासों और उपलब्धियों को समझने की एक तीर्थयात्रा की तरह है। इस कार्यक्रम को 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
महान विभूतियों के योगदान को किया याद
नरिंदर सिंह कपानी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके शोध ने आधुनिक संचार की दुनिया को नई दिशा दी। वहीं, भाई परमानंद को साहस, त्याग और राष्ट्रसेवा का प्रतीक बताते हुए उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और गदर पार्टी में उनके योगदान को रेखांकित किया।
प्राकृतिक खेती और बाजरे को बढ़ावा
पीएम मोदी ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ की ओर से प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ‘नव-त्रिन्जन’ पहल का जिक्र किया। उन्होंने मेघालय और नागालैंड में पारंपरिक बाजरे की खेती को फिर लोकप्रिय बनाने के प्रयासों की भी सराहना की। मेघालय में दो युवतियां बाजरे से कुकीज, केक और मफिन जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं।
नदी संरक्षण से आधुनिक चिकित्सा तक
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में सामुदायिक प्रयासों से हेवल नदी और प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने की पहल की सराहना की। उन्होंने आईआईटी मद्रास के ब्रेन सेंटर में मानव मस्तिष्क की त्रिआयामी मैपिंग के शोध और ई-संजीवनी के जरिए दूरदराज के इलाकों में मरीजों को मिल रही चिकित्सा सहायता के उदाहरण भी साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने बिहार के मखाने, कर्नाटक की अरहर दाल, महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों और खादी का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से कारीगरों और किसानों को प्रोत्साहन मिलता है।
