मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल ने बताया कि निर्धारित मुहूर्त के अनुसार, 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली शीतकालीन प्रवास के लिए मुखबा गांव पहुंचेगी। यहां स्थित मंदिर में अगले छह महीने तक मां गंगा विराजमान रहेंगी और श्रद्धालु उनके दर्शन कर सकेंगे।
धर्मानंद सेमवाल ने बताया कि परंपरा के अनुसार, गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की दिव्य डोली उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा स्थित मंदिर में पहुंचेगी। शीतकाल के दौरान श्रद्धालु गंगोत्री धाम के बजाय मुखबा गांव में मां गंगा के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
गंगोत्री धाम में हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा के दौरान यह धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहता है। कपाट बंद होने की तिथि और समय तय होने के बाद अब मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहित आगामी धार्मिक परंपराओं के निर्वहन की तैयारियों में जुटेंगे।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में सर्दी बढ़ने और बर्फबारी की आशंका को देखते हुए हर साल चारधाम के कपाट निर्धारित परंपराओं और शुभ मुहूर्त के अनुसार शीतकाल के लिए बंद किए जाते हैं। इस अवधि में धामों में नियमित दर्शन की व्यवस्था स्थगित रहती है, जबकि शीतकालीन प्रवास स्थलों पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मुखबा में मां गंगा की पूजा और दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। इससे श्रद्धालु शीतकाल में भी मां गंगा के दर्शन कर अपनी आस्था और धार्मिक परंपरा को बनाए रख सकेंगे।
