कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि कर्मवीर जयानंद भारती का उत्तराखंड के सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने के साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने, जनजागरण फैलाने और सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए उल्लेखनीय कार्य किए।
महाराज ने कहा कि जयानंद भारती का जीवन और संघर्ष प्रदेश की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है। उनसे संबंधित भवन वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। ऐसे में इसका संरक्षण और जीर्णोद्धार आवश्यक था, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन, संघर्ष और समाज सुधार के कार्यों से परिचित हो सकें।
गौरतलब है कि सतपाल महाराज ने 17 अक्टूबर को कर्मवीर जयानंद भारती की 146वीं जयंती के अवसर पर इस संबंध में जानकारी दी थी। विकासखंड बीरोंखाल के राजकीय इंटर कॉलेज परिसर, स्यूंसी में आयोजित दो दिवसीय राजकीय मेले के शुभारंभ समारोह में उन्होंने बताया था कि भवन के जीर्णोद्धार को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत हुई है।
अब इस कार्य को मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल किए जाने पर क्षेत्रीय लोगों में ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की उम्मीद बढ़ी है।
सतपाल महाराज ने कहा कि भवन का जीर्णोद्धार केवल एक पुराने निर्माण की मरम्मत नहीं, बल्कि उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास और सामाजिक चेतना से जुड़ी विरासत को सुरक्षित रखने का प्रयास है। इससे कर्मवीर जयानंद भारती के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उनके आग्रह को स्वीकार करना क्षेत्रीय जनता की भावनाओं का सम्मान है और स्वतंत्रता सेनानी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी है।
