नई दिल्ली। केंद्र सरकार इसी महीने के आखिर में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। इस सत्र में परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार को भरोसा है कि इन विधेयकों को लोकसभा से पारित कराने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या है। इसके साथ ही वह विपक्षी दलों से बातचीत कर समर्थन जुटाने की कोशिश में भी लगी है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और कुछ छोटे विपक्षी दलों के संपर्क में है। बताया जा रहा है कि इन दलों से बातचीत का उद्देश्य विधेयकों पर संभावित मतदान से पहले समर्थन हासिल करना है। यह राजनीतिक गतिविधियां ऐसे समय तेज हुई हैं, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहा है।
गौरतलब है कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन अभी तक उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाने की संभावना बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार सत्र की तारीखों और कार्यसूची को अंतिम रूप देने में जुटी है। तारीख तय करते समय 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाएगा। विशेष सत्र से पहले लगभग एक सप्ताह का नोटिस दिए जाने की संभावना है।
इससे पहले बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया था। अब सरकार इसी मुद्दे पर दोबारा प्रयास करने की तैयारी में है।
सूत्रों का कहना है कि डीएमके और अन्य छोटे दलों से संपर्क इसी रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, विशेष सत्र की अंतिम तारीख, कार्यसूची और विधेयकों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।
