कृषि मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि कृषि और बागवानी फसलों को हुए नुकसान का आकलन गंभीरता और तत्परता से किया जाए। सर्वे में क्षति की वास्तविक स्थिति दर्ज की जाए, जिससे प्रभावित किसानों को सहायता देने में अनावश्यक देरी न हो।
विभागीय आकलन के अनुसार, अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया और लमगड़ा विकासखंड में बागवानी फसलों को 15 से 70 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। चंपावत जिले के चंपावत, पाटी, लोहाघाट और बाराकोट क्षेत्रों में 33 प्रतिशत से अधिक क्षति दर्ज की गई है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर में बागवानी फसलों को करीब 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है।
हरिद्वार जिले के बहादराबाद और लक्सर क्षेत्रों में लगभग पांच हेक्टेयर में सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। यहां करीब 30 पेड़ गिरने के साथ तीन पॉलीहाउस भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। देहरादून के रायपुर क्षेत्र में फसलों को 10 से 15 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग में करीब 20 प्रतिशत और टिहरी के घनसाली क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है। पौड़ी जिले के नैनीडांडा और रिखणीखाल विकासखंड में भी करीब 30 प्रतिशत फसल क्षति दर्ज की गई है।
वहीं, खरीफ 2026 की फसलों के तहत प्रदेश में कुल 8,372.31 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र आपदा से प्रभावित हुआ है। ऊधम सिंह नगर के बाजपुर और गदरपुर में करीब 7,730 हेक्टेयर क्षेत्र में धान और गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। हरिद्वार की बहादराबाद, बादशाहपुर और जमालपुर न्याय पंचायतों में लगभग 600 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिसमें मुख्य रूप से धान की फसल शामिल है।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नुकसान की नियमित समीक्षा करते हुए सर्वे और आकलन की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता मिल सके।
