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पुलिस सलामी के साथ नाना पाटेकर को अंतिम विदाई, नम आंखों से प्रशंसकों ने कहा अलविदा

पुणे। दमदार आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और सहज अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को पुणे के पास डोणजे स्थित उनके फार्महाउस पर शासकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। पुलिस दल ने सलामी देकर उन्हें अंतिम सम्मान अर्पित किया। अपने प्रिय कलाकार के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक पहुंचे। माहौल गमगीन रहा और लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।

नाना पाटेकर के निधन से हिंदी और मराठी फिल्म जगत में शोक की लहर है। उनके पार्थिव शरीर को विमान से गोवा से पुणे लाया गया। इसके बाद उन्हें डोणजे स्थित फार्महाउस ले जाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

राजनीतिक और फिल्म जगत की हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि

नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित कई प्रमुख नेता पहुंचे। मंत्री चंद्रकांत पाटील, केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल, रामदास आठवले और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा परिजनों को सांत्वना दी।

फिल्म जगत से मकरंद अनासपुरे, नागराज मंजुळे, नीना कुलकर्णी, प्रवीण तरडे और सुरेश वाडकर सहित कई कलाकार और ‘नाम’ फाउंडेशन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

संघर्ष से बनाई अलग पहचान

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर हिंदी और मराठी सिनेमा की यादगार यात्रा बना। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली। फिल्म ‘नटसम्राट’ में गणपतराव बेलवलकर और ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी के किरदार ने उनकी अभिनय क्षमता के अलग-अलग रंग दिखाए।

उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

अभिनय के साथ समाजसेवा में भी योगदान

नाना पाटेकर ने अभिनय के अलावा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। ‘नाम’ फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने किसानों और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मदद के लिए काम किया।

उनका जाना सिनेमा जगत के लिए बड़ी क्षति है। उनकी बुलंद आवाज, यादगार संवाद और सशक्त अभिनय लंबे समय तक दर्शकों की स्मृतियों में जीवित रहेंगे। पर्दे पर अपने किरदारों को जीवंत बनाने वाले नाना पाटेकर अपने काम और सामाजिक योगदान के कारण हमेशा याद किए जाएंगे।

 

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