नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। करीब साढ़े तीन साल से यह 5.25 प्रतिशत पर स्थिर था। RBI के इस फैसले का असर होम लोन और कार लोन समेत अन्य कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है और ग्राहकों की EMI बढ़ने की संभावना है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसले की जानकारी देते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को प्रमुख चिंता के तौर पर सामने रखा। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर आगे चलकर खाने-पीने की वस्तुओं समेत अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
RBI ने रेपो रेट के साथ SDF रेट को 5.25 प्रतिशत और MSF रेट को 5.75 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति के रुख में भी बदलाव किया है। पहले जहां रुख न्यूट्रल था, अब इसे कैलिब्रेटेड टाइटनिंग किया गया है।
इसका संकेत है कि फिलहाल RBI का प्राथमिक फोकस महंगाई को नियंत्रित करने पर है। ऐसे में आने वाले समय में रेपो रेट में तत्काल कटौती की उम्मीद कम हो सकती है।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है। इसी के आधार पर बैंक अपने ग्राहकों के लिए कई तरह के लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। इसलिए रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर कर्ज लेने वालों की EMI पर पड़ सकता है।
