After Header-1

अब पहले ही पता चलेगा कहां आएगी बाढ़! IIT मद्रास की नई तकनीक से बढ़ी उम्मीद

नई दिल्ली/चेन्नई। देश के बड़े शहरों में तेज बारिश के बाद जलभराव और बाढ़ की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे महानगर हर साल भारी बारिश के दौरान इससे जूझते हैं। इसी चुनौती के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के नेतृत्व में हुए एक नए शोध ने शहरी बाढ़ के पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने की उम्मीद जगाई है।

आईआईटी मद्रास, जर्मनी के जीएफजेड हेल्महोल्ट्ज सेंटर फॉर जियोसाइंसेज, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) और काठमांडू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें बारिश बनने की वायुमंडलीय प्रक्रिया से लेकर पानी के बहाव और बाढ़ के फैलाव तक की पूरी कड़ी को एक साथ समझने का प्रयास किया गया।

शोध में मौसम अनुसंधान एवं पूर्वानुमान (डब्ल्यूआरएफ) मॉडल के जरिए वर्ष 2015 में चेन्नई में आई भीषण बाढ़ से जुड़ी वायुमंडलीय परिस्थितियों का अध्ययन किया गया। इसके बाद वर्षा के आंकड़ों को हाइड्रोलॉजिकल मॉडल एचईसी-एचएमएस और बाढ़ के फैलाव को समझने के लिए एचईसी-आरएएस मॉडल से जोड़ा गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, वातावरण में मौजूद एरोसोल को मॉडल में शामिल करने से अड्यार बेसिन में वर्षा के अनुमान में करीब 22 प्रतिशत सुधार हुआ। वहीं, बाढ़ के संभावित फैलाव का अनुमान लगाने की सटीकता में करीब 50 प्रतिशत तक सुधार देखा गया।

शोध का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चेन्नई जैसे शहरों में बारिश के पूर्वानुमान का सीधा संबंध जलाशयों के प्रबंधन से है। यदि पहले से पता हो कि किसी जलग्रहण क्षेत्र में कितनी और कहां बारिश होने वाली है, तो जलाशयों में पानी के भंडारण और अतिरिक्त पानी छोड़ने की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकती है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अभी तत्काल इस्तेमाल होने वाली बाढ़ चेतावनी प्रणाली नहीं है। अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में इसके परीक्षण और सत्यापन की जरूरत होगी। भविष्य में एरोसोल, बादल बनने वाले सूक्ष्म कणों और शहरी उत्सर्जन के अधिक सटीक आंकड़े जोड़कर इसे और बेहतर बनाया जा सकता है।

यह तकनीक सफल होने पर देश के अन्य बारिश प्रभावित महानगरों में भी शहरी बाढ़ का खतरा पहले से समझने में मदद कर सकती है।

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.