देहरादून। सूचना का अधिकार केवल सरकारी कार्यालयों से जानकारी हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि नागरिकों को शासन को समझने, सवाल पूछने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का अधिकार देता है। आरटीआई की पहुंच प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक बढ़ाने की जरूरत है। यह बात राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने बुधवार को लोक भवन में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की 21वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
राज्यपाल ने कार्यक्रम में डॉ. आरएस टोलिया राज्य स्तरीय सूचना का अधिकार अधिनियम वाद-विवाद प्रतियोगिता-2026 के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि आरटीआई पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का मजबूत आधार है। शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली जितनी अधिक पारदर्शी होगी, लोकतांत्रिक व्यवस्था उतनी ही प्रभावी और मजबूत बनेगी।
उन्होंने कहा कि समय के साथ शासन में गोपनीयता की सोच बदली है। आज पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यक शर्त बन चुकी हैं। इसे मजबूत करना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी का सामूहिक दायित्व है।
राज्यपाल ने कहा कि तकनीक ने सूचना तक पहुंच को आसान और तेज बनाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी नई तकनीकों का जिम्मेदारी से उपयोग कर आरटीआई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने सूचना आयोग से एआई और डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि नागरिकों को आरटीआई से जुड़ी जानकारी, मार्गदर्शन और जागरूकता आसानी से मिल सके।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तराखंड के दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आरटीआई जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। कहा कि प्रदेश के अंतिम छोर पर रहने वाले नागरिकों को भी सूचना के अधिकार की जानकारी और इसका इस्तेमाल करने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने आयोग की गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर, पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट, सचिव राजेंद्र कुमार, सचिव सूचना आयोग रजा अब्बास, अपर सचिव रीना जोशी समेत विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
