नई दिल्ली, भारत और नीदरलैंड ने जल क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को लेकर गुरुवार को दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में केंद्रीय जल आयोग, गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग तथा नीदरलैंड के जल संबंधी शोध संस्थान डेल्टारेस और डेल्फ्ट तकनीकी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और नीदरलैंड के बुनियादी ढांचा एवं जल प्रबंधन उपमंत्री जैप स्लूटमेकर ने भारत मंडपम में आयोजित 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह-2026 के दौरान बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
सीआर पाटिल ने कहा कि डेल्टारेस और डेल्फ्ट विश्वविद्यालय का भारतीय संस्थानों के साथ समझौता परियोजना के क्रियान्वयन और क्षमता निर्माण में उपयोगी साबित होगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मई 2026 में नीदरलैंड यात्रा के दौरान भी कल्पसर परियोजना पर चर्चा हुई थी। इसके बाद 16 मई को तकनीकी सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे।
कल्पसर परियोजना के तहत साबरमती, माही और धाधर नदियों के प्रवाह से मिलने वाले पानी का उपयोग कर मीठे पानी का जलाशय विकसित करने की योजना है। इसमें नर्मदा नदी से पहुंचाए जाने वाले पानी को भी शामिल किया जाएगा।
पाटिल के अनुसार, जुलाई 2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की नीदरलैंड यात्रा के दौरान बाढ़ सुरक्षा, तटीय बुनियादी ढांचे, हाइड्रोलिक मॉडलिंग, स्लुइस एवं पंपिंग सिस्टम, तटबंध तकनीक और पारिस्थितिक समाधान जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की गई।
जैप स्लूटमेकर ने कहा कि कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग भारत-नीदरलैंड जल साझेदारी में नए अवसर पैदा करेगा। एमओयू के तहत डच विशेषज्ञता और उन्नत इंजीनियरिंग तकनीकों को परियोजना की योजना, डिजाइन और क्रियान्वयन में साझा किया जाएगा।
सहयोग में हाइड्रोलिक एवं हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग, तटीय और संरचनात्मक इंजीनियरिंग, जलवायु अनुकूलन, तकनीकी समीक्षा, क्षमता निर्माण, ज्ञान हस्तांतरण और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पारिस्थितिकी और मछलियों के प्रवास से जुड़े अनुभवों को भी परियोजना में उपयोग करने पर जोर दिया गया है।