आरएसएस-विहिप का नया फोकस: जाति-कुंडली के बिना विवाह को मिलेगा बढ़ावा

कोच्चि, 22 सितंबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े संगठनों ने केरल में सामाजिक बदलाव और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू करने की घोषणा की है। इनमें जाति और कुंडली की बाध्यता के बिना विवाह को प्रोत्साहित करना, पुरुषों को शर्ट पहनकर मंदिर प्रवेश की सुविधा देने और युवाओं के लिए नि:शुल्क जिम शुरू करने की योजना शामिल है।

विहिप के केरल प्रदेश महासचिव अनिल विलायिल के अनुसार, संगठन अंतरजातीय विवाह के लिए आवश्यक सहयोग और एक सामान्य व्यवस्था विकसित करने पर काम करेगा। उनका कहना है कि कुंडली मिलान को विवाह की अनिवार्य शर्त नहीं माना जाना चाहिए। संगठन के अनुसार, कुंडली मिलान के कारण कई बार विवाह में देरी होती है या रिश्ते तय नहीं हो पाते। विहिप ने स्पष्ट किया कि यह पहल ज्योतिष के विरोध के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर विवाह को लेकर आ रही चुनौतियों के समाधान के उद्देश्य से है।

बैठक में मंदिरों में पुरुषों के शर्ट पहनकर प्रवेश का मुद्दा भी उठा। विहिप के मुताबिक, उसके प्रबंधन वाले 200 से अधिक मंदिरों में ऐसी अनुमति दी जा चुकी है। पावाकुलम महादेव मंदिर और तिरुनक्करा श्रीकृष्ण स्वामी मंदिर समेत कुछ मंदिरों में व्यवस्था लागू भी की गई है। संगठन अब अन्य मंदिरों में इसे लागू करने के लिए तंत्री समाज और संबंधित देवस्वम बोर्डों से बातचीत करेगा।

युवाओं को धार्मिक और सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए बजरंग दल और दुर्गावाहिनी से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए ‘बालोपासना केंद्र’ के नाम से जिमनैजियम शुरू करने की योजना भी बनाई गई है। संगठन के अनुसार, ऐसे केंद्रों की शुरुआत कुछ स्थानों पर की जा चुकी है।

विहिप ने इन पहलों को व्यापक सामाजिक बदलाव और संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

 

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