देहरादून। प्रदेश सरकार ने देश की रक्षा और राष्ट्रसेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले चार वीर शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके पैतृक गांवों में शहीद स्मारक और शहीद द्वार निर्माण को वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। सरकार के इस निर्णय को शहीदों के सम्मान और उनके परिजनों के प्रति कृतज्ञता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वीकृति के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के शहीद कांस्टेबल विनोद पाल सिंह की स्मृति में टिहरी गढ़वाल जिले के बालगंगा तहसील स्थित उनके पैतृक ग्राम पोस्ट-कैपर्स बारसार में शहीद स्मारक अथवा शहीद द्वार का निर्माण किया जाएगा।
पौड़ी गढ़वाल जिले के कल्जीखाल विकासखंड के ग्राम कोला-सिल्डी में शहीद पैराट्रूपर अमित कुमार अग्रवाल की स्मृति में शहीद द्वार बनाया जाएगा। वहीं, सीआरपीएफ के शहीद नायक भरत सिंह की स्मृति में पौड़ी जिले के रिखणीखाल तहसील क्षेत्र के ग्राम बूंगा मल्ला में शहीद स्मारक का निर्माण होगा।
इसके अलावा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के शहीद सहायक उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह की स्मृति में टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग तहसील स्थित ग्राम कोटी, पोस्ट आमनी में शहीद स्मारक बनाया जाएगा।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के सम्मान के साथ सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। शहीद स्मारक और द्वार वीर सपूतों के शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति के स्थायी प्रतीक बनेंगे।
उन्होंने कहा कि इन स्मारकों के माध्यम से नई पीढ़ी को शहीदों की गौरवगाथा से परिचित कराने के साथ युवाओं में राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति की भावना को भी मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को सैनिकों की भूमि के रूप में विशेष पहचान हासिल है। प्रदेश के सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शहीदों की स्मृति में बनने वाले ये स्मारक राज्य की ओर से उनके सर्वोच्च बलिदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के स्थायी प्रतीक होंगे।