मुंबई। एशिया कप ट्रॉफी को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले का समर्थन किया है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि यह निर्णय देशभर की जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
सैकिया ने कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध पहले से तनावपूर्ण रहे हैं और अप्रैल 2025 के बाद परिस्थितियां और गंभीर हुई हैं। ऐसे में भारतीय टीम का नकवी के हाथों से ट्रॉफी नहीं लेना स्वाभाविक था। उन्होंने कहा कि करीब डेढ़ साल पहले पुरुष टीम के एशिया कप जीतने के दौरान भी ऐसी ही स्थिति बनी थी और टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था।
बीसीसीआई सचिव ने कहा कि मौजूदा विवाद का ट्रॉफी से ज्यादा महत्व टीम के प्रदर्शन और देश की भावनाओं का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रॉफी हाथ में लेने या नहीं लेने से भारतीय क्रिकेट की उपलब्धि कम नहीं होती। उनका कहना है कि टीम का मुख्य लक्ष्य आगामी चुनौतियों के साथ 2028 टी20 विश्व कप की तैयारी करना और खिताब जीतना है।
सैकिया ने भारतीय महिला टीम के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि टीम ने पूरे एशिया कप टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और एक भी मुकाबला नहीं गंवाया। फाइनल में भी भारतीय टीम ने श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया।
उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष दोनों टीमों ने इस मामले में एकजुटता दिखाई है। बीसीसीआई का मानना है कि मैदान पर प्रदर्शन ही सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में लगातार बेहतर खेल दिखाकर अपनी क्षमता साबित की है।
बीसीसीआई के इस रुख के बाद एशिया कप ट्रॉफी विवाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि बोर्ड ने साफ संकेत दिया है कि उसका ध्यान विवाद के बजाय भारतीय क्रिकेट के भविष्य और आगामी बड़े टूर्नामेंटों की तैयारियों पर है।