Rakhi हमारी साझा संस्कृति और अटूट भाईचारे की सशक्त डोर : Pratima Bhowmik
Bru-Reang परिवारों संग पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मनाई राखी
ममता सिंह
नई दिल्ली/अगरतला।
त्रिपुरा के अंबासा स्थित हादुखुल में इस बार रक्षाबंधन का पर्व महज एक पारंपरिक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता की एक ऐतिहासिक मिसाल बन गया। विस्थापित जीवन के लंबे संघर्ष के बाद मुख्यधारा में लौटे करीब 700 ब्रू-रियांग परिवारों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक के साथ आत्मीयता और सद्भाव का अनोखा पर्व मनाया। जाति और जनजाति के सामाजिक भेदभाव को किनारे रखकर पूरे क्षेत्र के लोग इस बड़े उत्सव में एक सूत्र में पिरोए नजर आए।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक ने कहा कि राखी केवल रेशम का धागा नहीं, बल्कि हमारी साझा संस्कृति, सुरक्षा और अटूट भाईचारे की सशक्त डोर है। राज्य में गैर-जनजातीय और जनजातीय समुदायों के बीच बना यह रिश्ता त्रिपुरा की प्रगति और शांति की बुनियाद है।
इस भावुक और गरिमामय आयोजन में पूर्व विधायक परिमल देबबर्मा, अंबासा नगर परिषद के उपाध्यक्ष गोपाल सूत्रधर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामल कांति पाल भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में एक नया अध्याय तब जुड़ा, जब सालों से उपेक्षित और अपने अधिकारों की बांट जोह रहे कई स्थानीय नागरिकों को जीवन में पहली बार कलाई पर राखी बंधवाने का अवसर मिला। प्रतिमा भौमिक ने न सिर्फ बुजुर्गों और युवाओं को रक्षासूत्र बांधा, बल्कि स्थानीय लोगों ने भी उन्हें अपनी ‘दीदी’ मानकर श्रद्धा और स्नेह के साथ उनकी कलाई पर राखी बांधी।
- स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धा और स्नेह के साथ उनकी कलाई पर बांधी राखी…| Pic Credit : FB/Pratima Bhowmik
पहाड़ी अंचल के इस आयोजन में बच्चों की किलकारियों ने माहौल को और खुशनुमा बना दिया। प्रतिमा भौमिक बच्चों को गोद में उठाकर दुलारती और अपने हाथों से चॉकलेट बांटती दिखीं। इस बेहद सहज और मानवीय व्यवहार ने वहां मौजूद हर व्यक्ति का दिल छू लिया। वर्षों के पुनर्वास संघर्ष से उभरे ब्रू समुदाय के लिए यह आयोजन सुरक्षा, अपनापन और सम्मान का बड़ा प्रतीक बन गया।

मालूम हो कि रियांग यानी “ब्रू” जनजाति पूर्वाेत्तर की जनजातियों में से एक है। हमारे संविधान में इन्हें त्रिपुरा की अनुसूचित जनजातियों में से एक का दर्जा मिला हुआ है। त्रिपुरा के सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास कर रही “ब्रू” जनजाति कभी मिजोरम में रहा करती थी। 1997 में हुए जनजातीय संघर्षों के कारण इन्हें मिजोरम छोड़ना पड़ा था। यानी ब्रू समुदाय का इतिहास विस्थापन के गहरे जख्मों से भरा रहा है।
बहरहाल, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए गए 2020 के ऐतिहासिक पुनर्वास समझौते के बाद ब्रू-रियांग समुदाय को त्रिपुरा में स्थाई निवास समेत कई अधिकार मिल चुके हैं। ऐसे में रक्षाबंधन पर अंबासा में दिखा यह अपनापन राज्य में स्थाई शांति और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम माना जा रहा है।