नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत की जेन-जी (Gen Z) और जेन-अल्फा (Gen Alpha) को लेकर की गई टिप्पणी पर कांग्रेस महासचिव एवं वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को मोहन भागवत से किसी भी प्रकार के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। उनके इस संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल, हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने नई पीढ़ी की सोच और भूमिका पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि जेन-जी और जेन-अल्फा के युवा समाज और देश के प्रति गंभीर दृष्टिकोण रखते हैं। उनके अनुसार, आज के युवा सवाल पूछते हैं, जवाब चाहते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन संवाद का एक वैध और आवश्यक माध्यम है तथा नई पीढ़ी की बातों को गंभीरता से सुनने और समझने की जरूरत है।
इसी बयान को लेकर संसद परिसर में पत्रकारों ने प्रियंका गांधी से प्रतिक्रिया मांगी। इस पर उन्होंने कहा, “जेन-जी को मोहन भागवत जी से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।” उनके इस बयान को राजनीतिक जवाबी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब देश में युवाओं, रोजगार, शिक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोहन भागवत के बयान और उस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
हालांकि, दोनों नेताओं के बयानों का केंद्र युवा पीढ़ी ही रही, लेकिन दोनों की अभिव्यक्ति और राजनीतिक संदर्भ अलग-अलग रहे। एक ओर मोहन भागवत ने युवाओं की सोच और लोकतांत्रिक भागीदारी की सराहना की, वहीं प्रियंका गांधी ने यह स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी अपनी पहचान और क्षमता के लिए किसी राजनीतिक या वैचारिक प्रमाणपत्र की मोहताज नहीं है।