संत रविदास के ‘Ram Rajya’ को साकार करती Modi सरकार : अर्जुन राम मेघवाल

Arjun Ram Meghwal का सुशासन दर्शन: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संत रविदास के 'बेगमपुरा' (चिंतामुक्त शहर) के विचार को आधुनिक कल्याणकारी राज्य और पीएम मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प से जोड़कर एक नया वैचारिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया...

ममता सिंह

नई दिल्ली। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के विचार केवल प्रशासनिक अनुभवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें भारतीय सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक स्पष्टता का गहरा संगम दिखाई देता है। आज अपने आवास पर समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ हुई एक अनौपचारिक बैठक में उन्होंने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित अभिनव प्रकाश के लेख रविदास और बेगमपुरा से सुशासन का दर्शन के बहाने आधुनिक सुशासन का एक नया खाका खींचा।

एक पूर्व नौकरशाह और वर्तमान कानून मंत्री के रूप में मेघवाल ने इस बात को पुरजोर तरीके से रेखांकित किया कि 15वीं शताब्दी में संत रविदास द्वारा परिकल्पित ‘बेगमपुरा’ (ऐसा शहर जहां कोई गम या चिंता न हो) वस्तुतः स्वतंत्र भारत के ‘कल्याणकारी राज्य’ की पहली सैद्धांतिक और व्यावहारिक आधारशिला थी।

संत रविदास ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी जहां न अनुचित करों का बोझ हो, न संपत्ति छीने जाने का भय और न ही कोई नागरिक द्वितीय या तृतीय श्रेणी का माना जाए। मेघवाल का तर्क है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही मौजूदा नीतियां इसी भक्ति चेतना का आधुनिक रूपांतरण हैं। ‘आयुष्मान भारत’ और ‘PM-Kissan’ जैसी योजनाएं नागरिकों को बीमारी व आर्थिक तबाही के खौफ से बचाकर बेगमपुरा के ‘तस्वीश’ (चिंता) मुक्त जीवन के सिद्धांत को धरातल पर उतारती हैं।

इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘दरबारी संस्कृति’ का अंत है। संत रविदास के छंद सैल करहि जिउ भावै, महरम महल को अटकावै (जहां हर किसी को बिना रोक-टोक पहुंच का अधिकार हो) को उद्धृत करते हुए मेघवाल ने बताया कि कैसे ‘7 Race Course Road’ का नाम बदलकर ‘Lok Kalyan Marg’ करना, ‘Rajpath’ का ‘Kartavya Path’ बनना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए बिचौलियों को खत्म करना सत्ता के पारंपरिक अहंकार को ध्वस्त करता है। इसके अलावा, स्वामित्त्व योजना और अनुच्छेद 370 के निरस्त्रीकरण जैसे ऐतिहासिक कदमों ने हर भारतीय को स्वाभिमान और समानता का अधिकार दिया है।

यह सुशासन केवल आर्थिक आंकड़ों या जीडीपी की बाजीगरी नहीं है, बल्कि भारत की आत्मा और उसके आध्यात्मिक चिंतन से उपजा नैतिक दायित्व है। संत रविदास का Begumpura, संत कबीर का प्रेमनगर, संत तुकाराम का पंढरपुर और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का ‘प्रबुद्ध भारत’, ये सभी एक ही अविरल वैचारिक धारा के रूप हैं। आज का ‘विकसित भारत’ उसी ऐतिहासिक और वैचारिक श्रृंखला की सबसे मजबूत समकालीन कड़ी के रूप में उभर रहा है।

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