पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली से बहाल होगा युवाओं का अटूट विश्वास: पूर्व शिक्षा मंत्री Dr. Nishank ने सराहा विधेयक

Anti-Paper Leak Bill : उत्तराखंड के पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स संशोधन विधेयक' का स्वागत करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा माफिया पर नकेल कसने के लिए मील का पत्थर बताया...

चाणक्य मंत्र ब्यूरो

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने संसद द्वारा पारित ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक’ का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे देश के करोड़ों युवाओं के सुनहरे भविष्य की सुरक्षा में एक मील का पत्थर करार दिया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में सालों से हावी रहे पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा माफिया के गठजोड़ पर यह विधेयक एक कठोर कानून प्रहार के रूप में सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम से न केवल युवाओं का प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास बहाल होगा, बल्कि देश की समूची परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी।

शिक्षा व्यवस्था के सूक्ष्म जानकार डॉ. निशंक ने इस बात पर जोर दिया कि देश का मेहनती और प्रतिभाशाली युवा वर्षों तक दिन-रात पसीना बहाकर तैयारी करता है, लेकिन जब परीक्षा माफिया की काली छाया उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है, तो यह केवल एक छात्र की हार नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के भरोसे की टूट होती है।

केंद्र सरकार का यह नया सख्त कानून ऐसे ही संगठित गिरोहों के दुस्साहस को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प दर्शाता है। इस संशोधन विधेयक के माध्यम से कड़े दंड, भारी जुर्माने और गैर-जमानती प्रावधानों की व्यवस्था की गई है, जिससे किसी भी स्तर पर होने वाली धांधली पर पूर्ण विराम लग सके।

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने मोदी सरकार की युवा केंद्रित नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार देश के नौजवानों के स्वाभिमान, उनके श्रम और उनकी प्रतिभा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है और यह कानून उन्हें बिना किसी भय या पक्षपात के अपनी प्रतिभा साबित करने का एक सुरक्षित मंच प्रदान करेगा।

डॉ. निशंक ने इस ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह व शिक्षा मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि यह कानून भारतीय शिक्षा और भर्ती प्रणाली के इतिहास में शुचिता और न्याय के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।

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