लाल सागर में हूतियों का नया दांव, अब जहाजों से वसूला जाएगा टोल?

सना। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह ने दक्षिणी लाल सागर में अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री घेराबंदी की घोषणा के एक सप्ताह बाद अब समूह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर टोल वसूलने की योजना पर विचार कर रहा है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अभी तक हूती नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा या समय-सीमा जारी नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हूती नेतृत्व इस बात का आकलन कर रहा है कि बाब-अल-मंडेब से गुजरने वाले अधिकांश कारोबारी जहाजों से शुल्क किस प्रकार लिया जा सकता है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है, जो दक्षिणी लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और अन्य जरूरी सामान का समुद्री परिवहन होता है। ऐसे में यदि यहां टोल लागू किया जाता है तो वैश्विक शिपिंग लागत, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि 20 जुलाई को हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री प्रतिबंधों की घोषणा की थी। इसके बाद से इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि यह कदम क्षेत्रीय संघर्ष में अपने प्रभाव और दबाव को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि हाल ही में हूती संगठन के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने ईरान का दौरा किया था, जहां ईरानी अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई। इन बैठकों में कथित तौर पर बाब-अल-मंडेब से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही ईरान या हूती नेतृत्व ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। कुछ रिपोर्टों में चीनी जहाजों को संभावित टोल से छूट मिलने की भी बात कही गई है, लेकिन इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब-अल-मंडेब जलमार्ग पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, माल ढुलाई और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और शिपिंग लागत में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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