अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रविवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन किसी नए सैन्य हमले की खबर नहीं आने से बाजार में राहत का माहौल बना है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत मिलते ही निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड ऑयल दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आई।
शुरुआती कारोबार में सितंबर डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.9 प्रतिशत गिरकर 92.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इससे पहले शुक्रवार को भी इसमें 3.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो मई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर माना गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस महीने मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया था। फरवरी के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद सबसे बड़ी चिंता होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बनी रही। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और तेल उत्पादकों को वैकल्पिक मार्ग तलाशने पड़े।
हाल के दिनों में लाल सागर मार्ग का उपयोग करने वाले कुछ सऊदी तेल टैंकरों पर भी हमलों की खबरें सामने आई थीं, जिससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई थी। हालांकि अब हालात कुछ शांत होते दिखाई दे रहे हैं, जिसका असर तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।
इस बीच महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर नीति भी बाजार की दिशा तय कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है तो आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, जिससे तेल की मांग भी कमजोर हो सकती है।
रविवार को सितंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड की कीमत भी 5.6 प्रतिशत गिरकर 84.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं अक्टूबर डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड का भाव 4.6 प्रतिशत गिरकर 87.48 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक आर्थिक संकेतक तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।