‘Paper Leak विधेयक संशोधन’ को मंजूरी : 10 साल की जेल, 10 करोड़ का जुर्माना…
Modi Cabinet का प्रचंड प्रहार: मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक विधेयक संसोधन को मंजूरी दे दी है. फास्ट ट्रैक कोर्ट को लीगल बैकिंग के साथ 3 महीने में सुनवाई पूरी करने का कड़ा निर्देश। बताया जा रहा है कि सोमवार को ही इसे संसद में पेश किया जाएगा. जिसमें कुछ अहम प्रावधान किए गए हैं…
-ममता सिंह, नई दिल्ली।
देश के लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफियाओं की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘पेपर लीक विधेयक संशोधन’ को हरी झंडी दे दी गई है। सरकार का यह कदम केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि संगठित अपराध बन चुके पेपर लीक सिंडिकेट की जड़ों पर सीधा प्रहार है।
इस संशोधित विधेयक के तहत अपराध की गंभीरता को देखते हुए न्यूनतम नहीं, बल्कि बेहद कड़े दंड तय किए गए हैं, दोषियों को 10 साल तक की कठोर कैद और 10 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। लेकिन इस नए कानून की असली धार छिपी है इसके त्वरित न्याय प्रावधान में।
अक्सर कानूनी दांव-पेचों और ढीली जांच के कारण ऐसे मामलों के आरोपी सालों तक बच निकलते थे, जिससे नकल माफिया का हौसला बुलंद होता था। इसे जड़ से खत्म करने के लिए विधेयक में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को मजबूत कानूनी आधार दिया जा रहा है। इन अदालतों को कड़ा निर्देश रहेगा कि वे तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर अंतिम फैसला सुनाएं।
नड्डा से मिले प्रदर्शनकारी, बातचीत के बाद क्या बदलेगा आंदोलन? Pic Credit : Social Mediaसरकार का यह रुख उस निरंतरता का हिस्सा है, जिस पर प्रधानमंत्री ने देश के नाम अपने संदेश में जोर दिया था। लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की मानसिक पीड़ा को रेखांकित करते हुए उन्होंने साफ किया था कि पिछले ढाई महीनों में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां और 22 लाख छात्रों के लिए महज कुछ ही समय में पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा का आयोजन (जिसका परिणाम 19 जुलाई को जारी हुआ) केवल तात्कालिक राहत थे। असली लक्ष्य संस्थागत सुधार और भयमुक्त व्यवस्था का निर्माण है।
संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी, सरकार इस बिल को 27 जुलाई यानी सोमवार को पटल पर रखने जा रही है। स्पष्ट है कि अब केवल परीक्षा कराना काफी नहीं है, बल्कि उस भरोसे को बहाल करना प्राथमिकता है जो बार-बार लीक होते पर्चों के कारण टूट रहा था। नया कानून अगर अपनी पूरी ताकत से लागू होता है, तो यह शिक्षा व्यवस्था में शुचिता का एक नया युग तय करेगा।