राज्यपाल का युवाओं को संदेश, विकसित भारत-2047 की सबसे बड़ी ताकत क्यों है युवा शक्ति?

उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है और यही युवा शक्ति वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने युवाओं से आधुनिक तकनीक और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के समन्वय के साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

रविवार को देहरादून के थानो स्थित लेखक गांव में आयोजित 15वीं यंग थिंकर्स मीट के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल ने ‘वार एंड नैरेटिव्स’ विषय पर अपने विचार साझा किए। इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशभर से आए युवा विचारकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

राज्यपाल ने कहा कि इस मंच पर मौजूद प्रत्येक युवा करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए युवाओं के कंधों पर केवल अपने भविष्य की नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि विचारों, सूचना और नैरेटिव के स्तर पर भी लड़े जाएंगे। ऐसे में युवाओं को सत्य, शोध और तथ्यों पर आधारित मजबूत राष्ट्रीय नैरेटिव तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल जानकारी प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि नए विचारों का सृजनकर्ता और समाज का मार्गदर्शक है। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, मेटावर्स, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों में दक्षता हासिल करनी चाहिए, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर ज्ञान, नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बन सके।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की सनातन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि युवा आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों का समन्वय करेंगे, तो विकसित भारत-2047 का सपना निश्चित रूप से साकार होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन से निकले विचार देश के वैचारिक भविष्य को नई दिशा देंगे और युवा भारत के सशक्त एवं सकारात्मक नैरेटिव के निर्माता बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने युवा विचारकों को सम्मानित भी किया।

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