मुंबई। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी के नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने पहला टी20 विश्व कप जीता, आईसीसी ट्रॉफियां अपने नाम कीं और विश्व क्रिकेट में नई पहचान बनाई। बावजूद इसके, धोनी के करियर से जुड़ा एक ऐसा तथ्य है, जिसे जानकर क्रिकेट प्रशंसक हैरान रह जाते हैं। इतने शानदार करियर के बावजूद उन्हें टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक बार भी ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का पुरस्कार नहीं मिला।
साल 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले धोनी ने अपने प्रदर्शन से जल्द ही दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर-बल्लेबाजों में जगह बना ली। उन्होंने भारत के लिए 538 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 44.96 की औसत से 17,266 रन बनाए। उनके नाम 16 शतक और 108 अर्धशतक दर्ज हैं। वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 98 मैचों में 37.60 की औसत और 126.13 के स्ट्राइक रेट से 1,617 रन बनाए।
धोनी ने अपने करियर में कई बार दबाव भरे मुकाबलों में टीम को जीत दिलाई। उनकी फिनिशिंग क्षमता और शांत स्वभाव ने भारत को कई यादगार जीत दिलाईं। इसके बावजूद टी20 प्रारूप में उन्हें कभी भी मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी नहीं चुना गया।
इसके पीछे मुख्य वजह उनकी बल्लेबाजी की भूमिका रही। धोनी अक्सर नंबर पांच, छह या सात पर बल्लेबाजी करने आते थे, जहां उन्हें सीमित गेंदें खेलने का मौका मिलता था। ऐसे में वे भले ही तेज और प्रभावी पारियां खेलते रहे, लेकिन प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार अक्सर बड़ी पारी खेलने वाले शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों या मैच में अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों को मिलता रहा।
इसके अलावा, धोनी हमेशा टीम की सफलता को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखते थे। कई मौकों पर उन्होंने युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए खुद निचले क्रम में बल्लेबाजी की। यही उनकी नेतृत्व शैली की सबसे बड़ी पहचान रही।
हालांकि टी20 में यह अवॉर्ड उनसे दूर रहा, लेकिन एकदिवसीय क्रिकेट में उन्हें रिकॉर्ड 21 बार और टेस्ट क्रिकेट में दो बार प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं आईपीएल में भी चेन्नई सुपर किंग्स को पांच बार चैंपियन बनाने के दौरान उन्हें कई व्यक्तिगत सम्मान मिले। यही कारण है कि अवॉर्ड से अधिक धोनी की पहचान एक महान कप्तान और मैच फिनिशर के रूप में होती है।