नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ते हुए देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। केंद्र में मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बतौर निर्वाचित प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल का 4399वां दिन पूरा कर लिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम था, जिन्होंने चुनाव जीतकर 4398 दिनों तक प्रधानमंत्री पद संभाला था। इस उपलब्धि को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने ऐतिहासिक बताया है।
इस अवसर पर नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में एनडीए की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, क्षेत्रीय दलों के प्रमुख नेता और केंद्रीय मंत्री भी शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार, एनडीए के 35 सहयोगी दलों के करीब 75 वरिष्ठ नेता इस बैठक का हिस्सा बने। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), जनता दल (सेक्युलर) और अपना दल (सोनेलाल) के वरिष्ठ नेताओं ने भी बैठक में भाग लिया।
बैठक में आगामी राजनीतिक रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने तथा बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल रही।
सूत्रों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए विशेष बधाई प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने किया। प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए नेताओं को संबोधित करते हुए भविष्य के विकास लक्ष्यों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने और इस नए रिकॉर्ड के साथ भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है।