पौड़ी में 55 लाख की बड़ी सौगात, बिडोली विद्युत उपकेंद्र से खत्म होगी बिजली की परेशानी

 पौड़ी/देहरादून। उत्तराखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में कैबिनेट मंत्री एवं श्रीनगर विधायक डॉ. धन सिंह रावत ने बुधवार को पैठाणी, पाबौ और खिर्सू क्षेत्र का दौरा कर कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात देते हुए क्षेत्रीय विकास को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

अपने दौरे की शुरुआत डॉ. रावत ने पैठाणी स्थित प्रसिद्ध राहु मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की। उन्होंने प्रदेश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए मंदिर परिसर में चल रहे सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को गुणवत्ता और निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।

पाबौ क्षेत्र में कैबिनेट मंत्री ने 55.50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले बिडोली विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में लंबे समय से बनी विद्युत आपूर्ति की समस्याओं का समाधान होगा और ग्रामीणों को बेहतर बिजली सुविधा मिल सकेगी।

इसके अलावा उन्होंने राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय पसीणा में 9.14 लाख रुपये की लागत से होने वाले भवन निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य तथा 2.10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से मोल्काखाल-टीला मोटर मार्ग के वन टाइम मेंटेनेंस कार्य का भी शिलान्यास किया।

खिर्सू क्षेत्र में डॉ. रावत ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय डोबरी में 30.70 लाख रुपये की लागत से निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी और राजकीय प्राथमिक विद्यालय भैंसवाड़ा में पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी को अंतिम गांव तक पहुंचाना है। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।

 

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