देहरादून। प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री गरिमा मेहरा दसौनी ने चकराता वन प्रभाग के उप प्रभागीय वन अधिकारी (एसडीओ) राजीव नयन नौटियाल द्वारा सुरक्षा की मांग किए जाने के मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यदि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाला एक सरकारी अधिकारी स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि लंबे समय से अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को धमकियां मिलने की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में एक जिम्मेदार अधिकारी द्वारा सुरक्षा की मांग किया जाना यह दर्शाता है कि प्रदेश में खनन माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध न कराया जाना भी गंभीर चिंता का विषय है।
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि उत्तराखंड की नदियों, जंगलों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि अधिकारी ही अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, तो आम जनता खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगी।
गरिमा ने यह भी कहा कि अवैध खनन का मुद्दा केवल विपक्ष ही नहीं उठा रहा, बल्कि समय-समय पर सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं द्वारा भी इस विषय पर चिंता व्यक्त की गई है। ऐसे में सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने मांग की कि वन अधिकारी राजीव नयन नौटियाल को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, उन पर हुए कथित हमले और मिल रही धमकियों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रदेश में सक्रिय अवैध खनन नेटवर्क और उसके संरक्षणकर्ताओं की पहचान कर कठोर कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर आवाज उठाती रहेगी।