मुंबई। वैश्विक बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में दबाव में रहा और 9 पैसे की कमजोरी के साथ 94.94 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.93 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें हल्की कमजोरी आई और यह 94.94 के स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 9 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। इससे पहले शुक्रवार को भारतीय मुद्रा में मजबूत सुधार देखने को मिला था और रुपया 73 पैसे की बढ़त के साथ 94.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार डॉलर इंडेक्स के 99 के स्तर के करीब पहुंचने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के 93 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों में यह उछाल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इसके साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की अनिश्चितता में कमी आ सकती है, जिससे तेल आपूर्ति और कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।