Uttarakhand के जंगलों में बढ़ी वनाग्नि की घटनाएं: चमोली में महिला की झुलसकर मौत
वन मंत्री सुबोध उनियाल का बड़ा बयान: वर्तमान सीजन में अब तक आगजनी के कुल 394 मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी वजह से 331 हेक्टेयर से ज्यादा का बहुमूल्य वन क्षेत्र नष्ट हो चुका है। इस आपदा से वैज्ञानिक तरीके से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ हाथ मिलाया है...
देहरादून/चमोली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वनाग्नि का प्रकोप अत्यंत भयावह रूप ले चुका है। जंगलों से उठती आग की लपटें अब आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ने लगी हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। गढ़वाल मंडल के चमोली जिले में एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ जंगल की दावानल की चपेट में आने से एक महिला की जिंदा झुलसकर असमय मौत हो गई। वनाग्नि का यह विनाशकारी रूप जौनसार-बावर के चकराता क्षेत्र में भी देखने को मिला, जहाँ धधकती आग ने रिहायशी बस्तियों का रुख कर लिया। इसके चलते बागवानों के सेब के हरे-भरे बगीचे और ग्रामीणों की कई छानियां (पशुओं के बाड़े) जलकर पूरी तरह खाक हो गईं। प्रदेश में बेकाबू होते हालातों के मद्देनजर शासन ने पूरे राज्य में वनाग्नि को लेकर हाई अलर्ट लागू कर दिया है।
इस संकट काल में वन संपदा को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए राज्य सरकार ने भी प्रयास तेज कर दिए हैं। वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, वर्तमान सीजन में अब तक आगजनी के कुल 394 मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी वजह से 331 हेक्टेयर से ज्यादा का बहुमूल्य वन क्षेत्र नष्ट हो चुका है। इस आपदा से वैज्ञानिक तरीके से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ हाथ मिलाया है। इस विशेष समझौते के तहत आधुनिक तकनीक के जरिए जंगलों में आग लगने की घटनाओं का पूर्वानुमान (सटीक भविष्यवाणी) पहले ही मिल जाएगा, ताकि समय रहते इस पर नियंत्रण पाया जा सके। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस समय गढ़वाल क्षेत्र के पौड़ी, टिहरी और उत्तरकाशी जिले आग से सर्वाधिक प्रभावित हैं, जहाँ वन कर्मियों की टीमें स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मुस्तैदी के साथ आग पर काबू पाने की जद्दोजहद में जुटी हैं।