‘मेरी चुप्पी को कमजोरी न समझें’, बांग्लादेश लौटने को लेकर शेख हसीना का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली। Sheikh Hasina ने बांग्लादेश लौटने को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी गैरमौजूदगी को चुप्पी या कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि वह बहुत जल्द अपने देश वापस लौटेंगी और लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। फिलहाल वह भारत में रह रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक एवं कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि 17 मई 1981 उनके जीवन का बेहद भावुक दिन था, जब छह साल के निर्वासन के बाद वह भारत से बांग्लादेश लौटी थीं। उस समय भी उनके खिलाफ साजिशें हुई थीं, कई मुकदमे दर्ज किए गए थे और जान का खतरा बना हुआ था। बावजूद इसके जनता के समर्थन ने उन्हें वापसी की ताकत दी।

उन्होंने कहा कि इस बार उनकी वापसी किसी निश्चित तारीख पर निर्भर नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक माहौल, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक अधिकारों और कानून के शासन की बहाली पर निर्भर करेगी। हसीना ने दावा किया कि अब तक उन पर 19 बार जानलेवा हमले हो चुके हैं, लेकिन वह हर बार बच निकलीं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि Awami League को किसी प्रतिबंध या राजनीतिक दबाव से खत्म नहीं किया जा सकता। यह जनता की पार्टी है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसकी मजबूत जड़ें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता अवामी लीग से डरती है, क्योंकि पार्टी को खुलकर काम करने दिया गया तो सरकार की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियां सामने आ जाएंगी।

शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि देश एक बार फिर कट्टरपंथ और उग्रवाद की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के दौर में अवामी लीग नेताओं और समर्थकों के खिलाफ “खामोश राजनीतिक नरसंहार” चलाया गया। उनके मुताबिक, सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की गई, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को झूठे मामलों में गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और अवामी लीग भविष्य में फिर मजबूती से उभरेगी।

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