Central Bureau of Investigation ने नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच तेज करते हुए महाराष्ट्र के लातूर से एक बड़े कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब तक इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सीबीआई को शक है कि मोटेगांवकर के कोचिंग संस्थान रेणुकाई कैमिस्ट्री क्लासेस (आरसीसी) के जरिए नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कर छात्रों और कुछ स्थानीय डॉक्टरों तक पहुंचाए गए थे।
जांच एजेंसी के अनुसार शिवराज मोटेगांवकर लातूर समेत सात जिलों में आरसीसी नाम से कोचिंग सेंटर संचालित करता है। कुछ दिन पहले सीबीआई ने उसके घर पर कई घंटों तक पूछताछ की थी। इसके बाद आरसीसी के मुख्य कार्यालय पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। बताया जा रहा है कि इस कोचिंग नेटवर्क का वार्षिक कारोबार करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।
सीबीआई को संदेह है कि लातूर के कुछ प्रभावशाली डॉक्टरों ने मोटी रकम देकर लीक प्रश्नपत्र खरीदे थे, ताकि उनके बच्चों या अन्य अभ्यर्थियों को फायदा मिल सके। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े गिरोहों तक फैले हुए हैं। एजेंसी अब संदिग्ध बैंक लेन-देन और परीक्षा से पहले हुए पैसों के ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डेटा से लातूर के मोबाइल टावरों की लोकेशन मिली थी, जिसके बाद जांच का फोकस इस शहर पर गया। सीबीआई का मानना है कि लातूर इस पूरे सिंडिकेट का अहम केंद्र हो सकता है।
इस मामले ने देशभर के लाखों मेडिकल छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ा दी है। छात्र लगातार मांग कर रहे हैं कि पेपर लीक में शामिल सभी लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।