टोक्यो। दक्षिण चीन सागर में जापान के एक बड़े सैन्य कदम ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में हलचल पैदा कर दी है। फिलीपींस और अमेरिका के बीच चल रहे वार्षिक बालिकातन सैन्य अभ्यास के दौरान जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स ने पहली बार अपनी टाइप-88 एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल ने फिलीपींस के एक पुराने युद्धपोत को कुछ ही मिनटों में निशाना बनाकर पूरी तरह तबाह कर दिया।
इस सैन्य परीक्षण के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने इसे पिछले 80 वर्षों में जापान का पहला आक्रामक मिसाइल परीक्षण बताते हुए गंभीर चिंता जताई। चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान पर “नियो-मिलिटेरिज्म” यानी नए सैन्यवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाई गई जापान की शांतिवादी नीति से खतरनाक बदलाव का संकेत है।
यह सैन्य अभ्यास फिलीपींस के पाओय तट से लगभग 75 किलोमीटर दूर दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में आयोजित किया गया। रणनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि चीन को दिया गया स्पष्ट संदेश है। जिस क्षेत्र में यह मिसाइल दागी गई, वहां चीन लंबे समय से अपना दावा करता रहा है।
जापान ने अभ्यास के दौरान दो मिसाइलें दागीं, जिन्होंने लक्ष्य पर सटीक हमला किया। इस पूरे अभियान का निरीक्षण फिलीपींस के रक्षा सचिव Gilberto Teodoro और जापान के रक्षा मंत्री Shinjiro Koizumi ने मौके पर मौजूद रहकर किया। वहीं फिलीपींस के राष्ट्रपति Ferdinand Marcos Jr. ने मनीला से इसका लाइव प्रसारण देखा।
हाल के वर्षों में जापान ने अपनी रक्षा नीति में कई बड़े बदलाव किए हैं। सैन्य निर्यात पर लगे पुराने प्रतिबंधों में ढील देने के साथ वह अब क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को तेजी से मजबूत कर रहा है। इस युद्धाभ्यास में अमेरिका, जापान, कनाडा, फ्रांस और न्यूजीलैंड जैसे देशों की भागीदारी ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा गठबंधन की तस्वीर भी साफ कर दी है।