नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस स्थिति को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल बताया है और सरकार को बाजार के संकेतों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है।
आईएमएफ के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्ण श्रीनिवासन के मुताबिक, यदि सरकार लगातार ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखती है, तो इससे बाजार के वास्तविक संकेत प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब कीमतों को बाजार के अनुसार समायोजित करना जरूरी हो जाएगा।
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं, भारत का औसत क्रूड बास्केट भी 118.70 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है, जो चिंता का विषय है।
हाल ही में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया के कार्गो जहाजों को निशाना बनाने की खबरों ने वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ा दिया है। इससे बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
इस बीच, सरकारी तेल कंपनियां लगातार घाटे का सामना कर रही हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। यह स्थिति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं मानी जा रही।
पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से भारत में खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर यह राहत कब तक जारी रह पाएगी।