देहरादून। ग्राफिक एरा में विशेषज्ञ ने छात्र-छात्राओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उन्नत तर्क क्षमता (रीजनिंग), आधुनिक लैंग्वेज मॉडल्स, चेन-ऑफ-थॉट प्रॉम्प्टिंग, टेस्ट-टाइम स्केलिंग और एजेंटिक एआई जैसे उभरते क्षेत्रों की जानकारी दी।
आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में “लैंग्वेज मॉडल्स के जरिए तर्क क्षमता” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल रिसर्च साइंटिस्ट निकेत टंडन ने छात्र-छात्राओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तर्क क्षमता (रीजनिंग) के विकास और उसके व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआई ने पारंपरिक सांकेतिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक लैंग्वेज मॉडल्स के जरिए समस्याओं के समाधान को अधिक प्रभावी और सटीक बनाया है। प्रेजेंटेशन के माध्यम से उन्होंने “चेन-ऑफ-थॉट” प्रॉम्प्टिंग के जरिए एआई की सोचने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने, टेस्ट-टाइम स्केलिंग से उसके प्रदर्शन को बेहतर बनाने और एजेंटिक एआई के माध्यम से स्वायत्त निर्णय क्षमता विकसित करने की अवधारणा को सरल ढंग से समझाया।
इसके साथ ही, टूल-आधारित एआई सिस्टम्स के बढ़ते उपयोग और उनके वास्तविक जीवन में प्रभाव पर भी प्रकाश डाला, जिससे छात्रों को इस क्षेत्र के नवीनतम रुझानों से अवगत कराया गया।